खेल मंत्रालय छिपे 'नगीने' को तराश रहा है: किरण रिजिजू - Latest News, Breaking News, National News, World News, India News - NewsStone18

Latest News, Breaking News, National News, World News, India News - NewsStone18

Information to Everyone

PopAds.net - The Best Popunder Adnetwork

Post Top Ad

PopAds.net - The Best Popunder Adnetwork

खेल मंत्रालय छिपे 'नगीने' को तराश रहा है: किरण रिजिजू

Share This
मुंबई खेल एवं युवा मामलों के मंत्री खेलों में भारत का स्तर और ऊपर लाने का प्रयास कर रहे हैं। शनिवार को खेल मंत्री हमारे सहयोगी अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' मुंबई कार्यालय में बतौर गेस्ट संपादक उपस्थित हुए। यहां उन्होंने भारत में खेलों पर और भारत सरकार के 'खेलो इंडिया' कार्यक्रम पर चर्चा भी की। यहां पेश हैं उनसे हुई खास बातचीत के अंश... खेल मंत्रालय में आपके कार्यकाल को अभी सिर्फ चार महीने ही हुए हैं और आपके सामने कुछ बड़ी चुनौतियां आ रही हैं, जैसे- भारत में आयोजित होने वाला अंडर- 17 फीफा महिला वर्ल्ड कप और ओलिंपिक? अंडर- 17 फीफा महिला वर्ल्ड कप अगले साल भारत में आयोजित होने जा रहा है और हम भारत में अंडर 17 स्तर पर महिला फुटबॉल में एक बड़ी लीग को लॉन्च करने भी जा रहे हैं। यह एक बड़ी चुनौती होगी कि प्रतिभा को खोजें और फिर उसे चमकाने पर काम करें... फिलहाल स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के अंतर्गत हमारे पास 14,000 युवा हैं और वह हमारी विभिन्न अकैडमियों में ट्रेनिंग ले रहे हैं। जब एक बार उन्हें चुन लिया जाता है, तो फिर उनका भोजन, ट्रेनिंग और उनकी अन्य जरूरतों की जिम्मेदारी हम लेते हैं और जिन खिलाड़ियों को TOPS (ओलिंपिक प्रेपरेशन कार्यक्रम) के लिए चुना जाता है, उन्हें हम जेबखर्ची भी उपलब्ध कराते हैं। उन्हें खेल मंत्रालय की ओर से 50,000 रुपयए मासिक मिलते हैं। इससे उन्हें अपने परिवार को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है और उन्हें इससे सिर्फ और सिर्फ अपने खेल पर फोकस करने में मदद मिलती है। उन्हें (खिलाड़ियों को) फंडिंग की जरूरत होती है और इसीलिए मैं गांव, शहरों में जाकर कॉर्पोरेट्स के साथ मीटिंग करता हूं। आपको नहीं लगता भारत में अच्छे खेल केंद्रों और खेल सुविधाओं की कमी है? हर कॉलोनी में नहीं तो कम से कम हर शहर में को अच्छी खेल सुविधाएं जरूरी रूप से होनी ही चाहिए। मान लीजिए आप मुंबई में हैं और खेलना चाहते हैं, लेकिन आप ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि खेलने के लिए जगह ही नहीं है। हमें जोनल स्पोर्ट्स सेंटर बनाने की जरूरत है। इसके लिए कॉर्पोर्ट्स को आगे आना होगा। कुछ कॉर्पोरेट इस क्षेत्र में बहुत अच्छा कर रहे हैं। मैं हाल ही में बेल्लारी के करीब विजयनगर मं स्थित (कर्नाटक) के JSW इंस्पायर इंस्टीट्यूट गया था। यह देश में खेल की बेहतरीन सुविधाओं से लेस संस्थान है। इंफ्रास्ट्रक्चर का भी हो रहा विस्तार रिजिजू से जब पूछा गया कि अपने देश में स्पोर्ट्स ग्राउंड की कमी है, अगर कुछ ग्राउंड हैं भी तो वह विशेष रूप से क्रिकेट और फुटबॉल के लिए हैं। ऐसे में दूसरे स्पोर्ट्स खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए क्या संभावनाएं हैं? जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसी ही समस्याओं को दूर करने के मकसद से खेलो इंडिया गेम्स जैसे प्रोग्राम की शुरुआत की गई। सेंटर ऑफ एक्सलेंस में तराशे जा रहे नगीने इस प्रोग्राम के तहत बच्चों को उनकी रुचि के खेलों के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। साथ ही अलग-अलग स्पोर्ट्स के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इस प्रोग्राम के तहत देश में अलग-अलग सेंटर ऑफ एक्सलेंस (COE) बनाया गया है। इसकी मदद से टैलेंट की पहचान की जाती है और यहां उन्हें नगीने के रूप में तराशा जाता है। सरकार की तरफ से उन्हें हर तरह की मदद दी जा रही है। खिलाड़ियों के बीच भेदभाव करना गलत स्पोर्ट्समैन के लिए हेल्दी फूड बहुत जरूरी है। उचित न्यूट्रिशन के बिना उनका विकास संभव नहीं है। लेकिन, यह दुर्भाग्य की बात है कि देश के अलग-अलग खेल सेंटर में खाने-पीने की उचित व्यवस्था नहीं है। इससे इतर जो व्यवस्थाएं और सुविधाएं उपलब्ध भी हैं, उसमें भेदभाव की खबरें आती रहती हैं। परिस्थितियां बदल रही हैं किरण रिजिजू ने इस विवाद को लेकर अपना निजी अनुभव बताते हुए कहा कि एकबार मैं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स, पटियाला गया था। मैंने इसे अनुभव किया कि जूनियर खिलाड़ी को सीनियर के मुकाबले कम न्यूट्रीशन मिल रहा था। रिजिजू ने कहा कि हमारे सामने ये तमाम चुनौतियां हैं, लेकिन हम बहुत तेजी, जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

https://ift.tt/31NIgg8
from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/33477wj

October 05, 2019 at 06:26PM

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

PopAds.net - The Best Popunder Adnetwork